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VedicSpaceपंचांगदिल्ली › 2026-10-18

दिल्ली पंचांग — 18 अक्टूबर 2026

शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र · रविवार · दिल्ली (28.6139°, 77.209°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948तुला (आश्विन)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना दिल्ली (28.6139°, 77.209°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:23 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष सप्तमीतक 08:28 AMभद्रा तिथि (पक्ष की 2, 7 और 12) — शुभ एवं सहायक।
वाररविवारअधिकार, शासन, औषधि, पिता, पराक्रम, स्वर्ण।
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा · पाद 3तक 12:49 PMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगसुकर्मातक 11:56 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणवणिजतक 08:28 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:23 AM
सूर्यास्त05:49 PM
चन्द्रोदय01:10 PM
चन्द्रास्त11:27 PM
चन्द्र राशिधनु
सूर्य राशितुला
अयन · ऋतुदक्षिणायन · शरद्

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:43 AM – 12:28 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:47 AM – 05:35 AM
अमृत काल07:48 AM – 09:36 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल04:23 PM – 05:49 PM
गुलिक काल02:57 PM – 04:23 PM
यमगण्ड12:06 PM – 01:31 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त04:17 PM – 05:03 PM

दिन चौघड़िया

उद्वेग06:23 AM – 07:48 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर07:48 AM – 09:14 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:14 AM – 10:40 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:40 AM – 12:06 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:06 PM – 01:31 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ01:31 PM – 02:57 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:57 PM – 04:23 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग04:23 PM – 05:49 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

शुभ05:49 PM – 07:23 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग07:23 PM – 08:57 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग08:57 PM – 10:31 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर10:31 PM – 12:06 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ12:06 AM – 01:40 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत01:40 AM – 03:14 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल03:14 AM – 04:48 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ04:48 AM – 06:23 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle