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VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2025-12-29

द्वारका पंचांग — 29 दिसम्बर 2025

शुक्ल पक्ष नवमी तिथि, रेवती नक्षत्र · सोमवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2082 (कालयुक्ति)शक संवत् 1947धनु (मार्गशीर्ष)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 07:32 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष नवमीतक 10:12 AMरिक्ता तिथि — क्षयकारी; कठोर अथवा नित्य कर्मों हेतु।
वारसोमवारयात्रा, जल-द्रव्य, लोक-व्यवहार, शान्ति, माता, कोमल कर्म।
नक्षत्ररेवती · पाद 4तक 07:41 AMमृदु नक्षत्र — विवाह, मैत्री, संगीत, आभूषण, सुख।
योगपरिघतक 07:36 AMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणकौलवतक 10:12 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय07:32 AM
सूर्यास्त06:20 PM
चन्द्रोदय01:40 PM
चन्द्रास्त01:50 AM
चन्द्र राशिमीन
सूर्य राशिधनु
अयन · ऋतुदक्षिणायन · हेमन्त

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त05:56 AM – 06:44 AM
अमृत काल06:57 AM – 08:27 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल08:53 AM – 10:14 AM
गुलिक काल02:17 PM – 03:38 PM
यमगण्ड11:35 AM – 12:56 PM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त12:34 PM – 01:17 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त03:27 PM – 04:10 PM

दिन चौघड़िया

अमृत07:32 AM – 08:53 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल08:53 AM – 10:14 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ10:14 AM – 11:35 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग11:35 AM – 12:56 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग12:56 PM – 02:17 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर02:17 PM – 03:38 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ03:38 PM – 04:59 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत04:59 PM – 06:20 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

रात्रि चौघड़िया

चर06:20 PM – 07:59 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ07:59 PM – 09:38 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत09:38 PM – 11:17 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल11:17 PM – 12:56 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:56 AM – 02:35 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:35 AM – 04:14 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग04:14 AM – 05:53 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर05:53 AM – 07:32 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle