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VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2026-07-11

द्वारका पंचांग — 11 जुलाई 2026

कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि, कृत्तिका नक्षत्र · शनिवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948मिथुन (ज्येष्ठ)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:17 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष द्वादशीतक 02:04 AMभद्रा तिथि (पक्ष की 2, 7 और 12) — शुभ एवं सहायक।
वारशनिवारश्रम, लोहा, तेल, दीर्घकालिक कार्य — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रकृत्तिका · पाद 4तक 11:03 AMमिश्र नक्षत्र — मिश्रित फल; अग्नि-कर्म एवं नित्य कार्य।
योगगण्डतक 12:05 AMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणकौलवतक 03:46 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:17 AM
सूर्यास्त07:42 PM
चन्द्रोदय02:42 AM
चन्द्रास्त04:39 PM
चन्द्र राशिवृषभ
सूर्य राशिमिथुन
अयन · ऋतुउत्तरायण · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:32 PM – 01:26 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:41 AM – 05:29 AM
अमृत काल09:10 AM – 10:37 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल09:38 AM – 11:18 AM
गुलिक काल06:17 AM – 07:57 AM
यमगण्ड02:40 PM – 04:20 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त09:51 AM – 10:45 AM
दुर्मुहूर्त03:13 PM – 04:07 PM

दिन चौघड़िया

काल06:17 AM – 07:57 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ07:57 AM – 09:38 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:38 AM – 11:18 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग11:18 AM – 12:59 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:59 PM – 02:40 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ02:40 PM – 04:20 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत04:20 PM – 06:01 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल06:01 PM – 07:42 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

लाभ07:42 PM – 09:01 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत09:01 PM – 10:20 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल10:20 PM – 11:40 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:40 PM – 12:59 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:59 AM – 02:18 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग02:18 AM – 03:38 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:38 AM – 04:57 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ04:57 AM – 06:17 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle