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VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2026-08-03

द्वारका पंचांग — 3 अगस्त 2026

कृष्ण पक्ष पञ्चमी तिथि, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र · सोमवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948कर्क (आषाढ़)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:27 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष पञ्चमीतक 10:54 PMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारसोमवारयात्रा, जल-द्रव्य, लोक-व्यवहार, शान्ति, माता, कोमल कर्म।
नक्षत्रउत्तराभाद्रपद · पाद 2तक 10:00 PMस्थिर नक्षत्र — गृह-प्रवेश, रोपण, राज्याभिषेक, दीर्घकालिक एवं स्थायी कर्म।
योगसुकर्मातक 09:13 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणकौलवतक 11:08 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:27 AM
सूर्यास्त07:34 PM
चन्द्रोदय10:32 PM
चन्द्रास्त10:22 AM
चन्द्र राशिमीन
सूर्य राशिकर्क
अयन · ऋतुदक्षिणायन · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त04:51 AM – 05:39 AM
अमृत काल05:35 PM – 07:13 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल08:05 AM – 09:43 AM
गुलिक काल02:38 PM – 04:17 PM
यमगण्ड11:22 AM – 01:00 PM
वर्ज्यम्07:52 AM – 09:29 AM
अभिजित मुहूर्त12:34 PM – 01:26 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त04:04 PM – 04:56 PM

दिन चौघड़िया

अमृत06:27 AM – 08:05 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल08:05 AM – 09:43 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ09:43 AM – 11:22 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग11:22 AM – 01:00 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग01:00 PM – 02:38 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर02:38 PM – 04:17 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ04:17 PM – 05:55 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत05:55 PM – 07:34 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

रात्रि चौघड़िया

चर07:34 PM – 08:55 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:55 PM – 10:17 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:17 PM – 11:38 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल11:38 PM – 01:00 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ01:00 AM – 02:22 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:22 AM – 03:43 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:43 AM – 05:05 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर05:05 AM – 06:27 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle