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VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2026-08-18

द्वारका पंचांग — 18 अगस्त 2026

शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि, स्वाती नक्षत्र · मङ्गलवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948सिंह (श्रावण)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:32 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष षष्ठीतक 05:51 PMनन्दा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारमङ्गलवारपराक्रम, शल्य-चिकित्सा, भूमि, विवाद — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रस्वाती · पाद 1तक 06:47 AMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगशुक्लतक 03:23 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणतैतिलतक 05:51 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:32 AM
सूर्यास्त07:23 PM
चन्द्रोदय11:43 AM
चन्द्रास्त10:52 PM
चन्द्र राशितुला
सूर्य राशिसिंह
अयन · ऋतुदक्षिणायन · वर्षा

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:31 PM – 01:23 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:56 AM – 05:44 AM
अमृत काल09:51 PM – 11:34 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल04:10 PM – 05:46 PM
गुलिक काल12:57 PM – 02:33 PM
यमगण्ड09:44 AM – 11:21 AM
वर्ज्यम्11:31 AM – 01:14 PM
दुर्मुहूर्त11:40 AM – 12:31 PM
दुर्मुहूर्त03:06 PM – 03:57 PM

दिन चौघड़िया

रोग06:32 AM – 08:08 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग08:08 AM – 09:44 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर09:44 AM – 11:21 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ11:21 AM – 12:57 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत12:57 PM – 02:33 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल02:33 PM – 04:10 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ04:10 PM – 05:46 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग05:46 PM – 07:23 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

काल07:23 PM – 08:46 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ08:46 PM – 10:10 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग10:10 PM – 11:33 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग11:33 PM – 12:57 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:57 AM – 02:21 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ02:21 AM – 03:44 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत03:44 AM – 05:08 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल05:08 AM – 06:32 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle