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VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2026-09-16

द्वारका पंचांग — 16 सितम्बर 2026

शुक्ल पक्ष पञ्चमी तिथि, विशाखा नक्षत्र · बुधवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948सिंह (श्रावण)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:41 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष पञ्चमीतक 08:59 AMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारबुधवारव्यापार, विद्या, लेखा, संवाद, लघु यात्रा।
नक्षत्रविशाखा · पाद 3तक 05:22 PMमिश्र नक्षत्र — मिश्रित फल; अग्नि-कर्म एवं नित्य कार्य।
योगवैधृतितक 12:22 PMमहापात योग — समस्त शुभ कर्मों हेतु पूर्णतः वर्जित।
करणबालवतक 08:59 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:41 AM
सूर्यास्त06:57 PM
चन्द्रोदय11:23 AM
चन्द्रास्त10:09 PM
चन्द्र राशितुला
सूर्य राशिसिंह
अयन · ऋतुदक्षिणायन · वर्षा

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त05:05 AM – 05:53 AM
अमृत काल08:27 AM – 10:12 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल12:49 PM – 02:21 PM
गुलिक काल11:17 AM – 12:49 PM
यमगण्ड08:13 AM – 09:45 AM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त12:24 PM – 01:13 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त09:57 AM – 10:46 AM

दिन चौघड़िया

लाभ06:41 AM – 08:13 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:13 AM – 09:45 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल09:45 AM – 11:17 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:17 AM – 12:49 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:49 PM – 02:21 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग02:21 PM – 03:53 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:53 PM – 05:25 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ05:25 PM – 06:57 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

रात्रि चौघड़िया

उद्वेग06:57 PM – 08:25 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर08:25 PM – 09:53 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:53 PM – 11:21 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत11:21 PM – 12:49 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:49 AM – 02:17 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ02:17 AM – 03:45 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:45 AM – 05:13 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग05:13 AM – 06:41 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle