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VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2027-04-17

द्वारका पंचांग — 17 अप्रैल 2027

शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि, मघा नक्षत्र · शनिवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: आंशिक (2/4)विक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949मेष (चैत्र)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:33 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष एकादशीतक 09:28 AMनन्दा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारशनिवारश्रम, लोहा, तेल, दीर्घकालिक कार्य — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रमघा · पाद 4तक 07:08 AMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगवृद्धितक 12:24 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणविष्टि (भद्रा)तक 09:28 AMभद्रा — समस्त शुभ कर्म वर्जित; कठोर कर्मों हेतु।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:33 AM
सूर्यास्त07:15 PM
चन्द्रोदय04:02 PM
चन्द्रास्त03:51 AM
चन्द्र राशिसिंह
सूर्य राशिमेष
अयन · ऋतुउत्तरायण · वसन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:28 PM – 01:19 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:57 AM – 05:45 AM
अमृत काल05:24 AM – 06:55 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल09:43 AM – 11:18 AM
गुलिक काल06:33 AM – 08:08 AM
यमगण्ड02:29 PM – 04:04 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त09:56 AM – 10:47 AM
दुर्मुहूर्त03:01 PM – 03:51 PM

दिन चौघड़िया

काल06:33 AM – 08:08 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ08:08 AM – 09:43 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:43 AM – 11:18 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग11:18 AM – 12:54 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:54 PM – 02:29 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ02:29 PM – 04:04 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत04:04 PM – 05:39 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल05:39 PM – 07:15 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

लाभ07:15 PM – 08:39 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:39 PM – 10:04 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल10:04 PM – 11:29 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:29 PM – 12:54 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:54 AM – 02:18 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग02:18 AM – 03:43 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:43 AM – 05:08 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ05:08 AM – 06:33 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle