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VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2027-07-18

द्वारका पंचांग — 18 जुलाई 2027

शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र · रविवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: आंशिक (3/4)विक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949कर्क (आषाढ़)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:20 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष पूर्णिमातक 09:14 PMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वाररविवारअधिकार, शासन, औषधि, पिता, पराक्रम, स्वर्ण।
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा · पाद 4तक 11:18 AMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगवैधृतितक 03:21 PMमहापात योग — समस्त शुभ कर्मों हेतु पूर्णतः वर्जित।
करणविष्टि (भद्रा)तक 08:00 AMभद्रा — समस्त शुभ कर्म वर्जित; कठोर कर्मों हेतु।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:20 AM
सूर्यास्त07:41 PM
चन्द्रोदय07:42 PM
चन्द्रास्त05:45 AM
चन्द्र राशिधनु
सूर्य राशिकर्क
अयन · ऋतुदक्षिणायन · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:33 PM – 01:27 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:44 AM – 05:32 AM
अमृत काल06:14 AM – 08:02 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल06:00 PM – 07:41 PM
गुलिक काल04:20 PM – 06:00 PM
यमगण्ड01:00 PM – 02:40 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त05:54 PM – 06:47 PM

दिन चौघड़िया

उद्वेग06:20 AM – 08:00 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर08:00 AM – 09:40 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:40 AM – 11:20 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत11:20 AM – 01:00 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल01:00 PM – 02:40 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ02:40 PM – 04:20 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग04:20 PM – 06:00 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग06:00 PM – 07:41 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

शुभ07:41 PM – 09:00 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:00 PM – 10:20 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग10:20 PM – 11:40 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर11:40 PM – 01:00 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ01:00 AM – 02:20 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत02:20 AM – 03:40 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल03:40 AM – 05:00 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ05:00 AM – 06:20 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle