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VedicSpaceपंचांगहरिद्वार › 2026-06-17

हरिद्वार पंचांग — 17 जून 2026

शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र · बुधवार · उत्तराखंड (29.9457°, 78.1642°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948मिथुन (ज्येष्ठ)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना हरिद्वार (29.9457°, 78.1642°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:16 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष तृतीयातक 09:39 PMजया तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारबुधवारव्यापार, विद्या, लेखा, संवाद, लघु यात्रा।
नक्षत्रपुनर्वसु · पाद 3तक 01:37 PMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगध्रुवतक 08:51 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणतैतिलतक 11:12 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:16 AM
सूर्यास्त07:21 PM
चन्द्रोदय07:25 AM
चन्द्रास्त09:44 PM
चन्द्र राशिमिथुन
सूर्य राशिमिथुन
अयन · ऋतुउत्तरायण · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त03:40 AM – 04:28 AM
अमृत काल10:43 AM – 12:10 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल12:18 PM – 02:04 PM
गुलिक काल10:32 AM – 12:18 PM
यमगण्ड07:01 AM – 08:47 AM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त11:50 AM – 12:46 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त09:01 AM – 09:57 AM

दिन चौघड़िया

लाभ05:16 AM – 07:01 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत07:01 AM – 08:47 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल08:47 AM – 10:32 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ10:32 AM – 12:18 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:18 PM – 02:04 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग02:04 PM – 03:49 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:49 PM – 05:35 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ05:35 PM – 07:21 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

रात्रि चौघड़िया

उद्वेग07:21 PM – 08:35 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर08:35 PM – 09:49 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:49 PM – 11:04 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत11:04 PM – 12:18 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:18 AM – 01:32 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ01:32 AM – 02:47 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:47 AM – 04:01 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग04:01 AM – 05:16 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle