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VedicSpaceपंचांगहरिद्वार › 2027-01-22

हरिद्वार पंचांग — 22 जनवरी 2027

शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र · शुक्रवार · उत्तराखंड (29.9457°, 78.1642°)

दिन शुद्धि: आंशिक (3/4)विक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949मकर (पौष)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना हरिद्वार (29.9457°, 78.1642°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 07:12 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष पूर्णिमातक 05:47 PMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारशुक्रवारकला, संगीत, विवाह, वाहन, ऐश्वर्य, सुख।
नक्षत्रपुनर्वसु · पाद 4तक 10:25 AMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगविष्कुम्भतक 01:50 PMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणविष्टि (भद्रा)तक 07:38 AMभद्रा — समस्त शुभ कर्म वर्जित; कठोर कर्मों हेतु।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय07:12 AM
सूर्यास्त05:46 PM
चन्द्रोदय05:44 PM
चन्द्रास्त06:56 AM
चन्द्र राशिकर्क
सूर्य राशिमकर
अयन · ऋतुउत्तरायण · हेमन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:07 PM – 12:50 PM
ब्रह्म मुहूर्त05:36 AM – 06:24 AM
अमृत काल09:31 AM – 10:55 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल11:09 AM – 12:29 PM
गुलिक काल08:31 AM – 09:50 AM
यमगण्ड03:07 PM – 04:26 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त11:25 AM – 12:07 PM
दुर्मुहूर्त02:14 PM – 02:56 PM

दिन चौघड़िया

चर07:12 AM – 08:31 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:31 AM – 09:50 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत09:50 AM – 11:09 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल11:09 AM – 12:29 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:29 PM – 01:48 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग01:48 PM – 03:07 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:07 PM – 04:26 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर04:26 PM – 05:46 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

रात्रि चौघड़िया

रोग05:46 PM – 07:26 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग07:26 PM – 09:07 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर09:07 PM – 10:48 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ10:48 PM – 12:29 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत12:29 AM – 02:09 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल02:09 AM – 03:50 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ03:50 AM – 05:31 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग05:31 AM – 07:12 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle