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VedicSpaceपंचांगहरिद्वार › 2027-04-21

हरिद्वार पंचांग — 21 अप्रैल 2027

कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि, स्वाती नक्षत्र · बुधवार · उत्तराखंड (29.9457°, 78.1642°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949मेष (चैत्र)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना हरिद्वार (29.9457°, 78.1642°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:45 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष प्रतिपदातक 03:30 AMनन्दा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारबुधवारव्यापार, विद्या, लेखा, संवाद, लघु यात्रा।
नक्षत्रस्वाती · पाद 1तक 04:44 AMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगवज्रतक 04:10 PMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणबालवतक 03:40 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:45 AM
सूर्यास्त06:48 PM
चन्द्रोदय07:31 PM
चन्द्रास्त05:28 AM
चन्द्र राशितुला
सूर्य राशिमेष
अयन · ऋतुउत्तरायण · वसन्त

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त04:09 AM – 04:57 AM
अमृत काल07:35 PM – 09:12 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल12:16 PM – 01:54 PM
गुलिक काल10:38 AM – 12:16 PM
यमगण्ड07:22 AM – 09:00 AM
वर्ज्यम्09:52 AM – 11:29 AM
अभिजित मुहूर्त11:50 AM – 12:42 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त09:13 AM – 10:06 AM

दिन चौघड़िया

लाभ05:45 AM – 07:22 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत07:22 AM – 09:00 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल09:00 AM – 10:38 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ10:38 AM – 12:16 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:16 PM – 01:54 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग01:54 PM – 03:32 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:32 PM – 05:10 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ05:10 PM – 06:48 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

रात्रि चौघड़िया

उद्वेग06:48 PM – 08:10 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर08:10 PM – 09:32 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:32 PM – 10:54 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:54 PM – 12:16 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:16 AM – 01:38 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ01:38 AM – 03:00 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:00 AM – 04:22 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग04:22 AM – 05:45 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle