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VedicSpaceपंचांगहरिद्वार › 2027-05-07

हरिद्वार पंचांग — 7 मई 2027

शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि, कृत्तिका नक्षत्र · शुक्रवार · उत्तराखंड (29.9457°, 78.1642°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949मेष (चैत्र)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना हरिद्वार (29.9457°, 78.1642°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:30 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष प्रतिपदातक 02:14 PMनन्दा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारशुक्रवारकला, संगीत, विवाह, वाहन, ऐश्वर्य, सुख।
नक्षत्रकृत्तिका · पाद 1तक 11:42 PMमिश्र नक्षत्र — मिश्रित फल; अग्नि-कर्म एवं नित्य कार्य।
योगसौभाग्यतक 08:57 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणबवतक 02:14 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:30 AM
सूर्यास्त06:58 PM
चन्द्रोदय05:45 AM
चन्द्रास्त08:10 PM
चन्द्र राशिमेष
सूर्य राशिमेष
अयन · ऋतुउत्तरायण · वसन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:47 AM – 12:40 PM
ब्रह्म मुहूर्त03:54 AM – 04:42 AM
अमृत काल08:58 PM – 10:27 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल10:33 AM – 12:14 PM
गुलिक काल07:11 AM – 08:52 AM
यमगण्ड03:36 PM – 05:17 PM
वर्ज्यम्12:01 PM – 01:30 PM
दुर्मुहूर्त10:53 AM – 11:47 AM
दुर्मुहूर्त02:28 PM – 03:22 PM

दिन चौघड़िया

चर05:30 AM – 07:11 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ07:11 AM – 08:52 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:52 AM – 10:33 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल10:33 AM – 12:14 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:14 PM – 01:55 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग01:55 PM – 03:36 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:36 PM – 05:17 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर05:17 PM – 06:58 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

रात्रि चौघड़िया

रोग06:58 PM – 08:17 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग08:17 PM – 09:36 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर09:36 PM – 10:55 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ10:55 PM – 12:14 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत12:14 AM – 01:33 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल01:33 AM – 02:52 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ02:52 AM – 04:11 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग04:11 AM – 05:30 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle