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VedicSpaceपंचांगजयपुर › 2026-10-09

जयपुर पंचांग — 9 अक्टूबर 2026

कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र · शुक्रवार · राजस्थान (26.9124°, 75.7873°)

दिन शुद्धि: आंशिक (3/4)विक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948कन्या (भाद्रपद)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना जयपुर (26.9124°, 75.7873°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:23 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष चतुर्दशीतक 09:36 PMरिक्ता तिथि — क्षयकारी; कठोर अथवा नित्य कर्मों हेतु।
वारशुक्रवारकला, संगीत, विवाह, वाहन, ऐश्वर्य, सुख।
नक्षत्रउत्तरा फाल्गुनी · पाद 2तक 09:19 PMस्थिर नक्षत्र — गृह-प्रवेश, रोपण, राज्याभिषेक, दीर्घकालिक एवं स्थायी कर्म।
योगब्रह्मतक 11:21 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणविष्टि (भद्रा)तक 09:53 AMभद्रा — समस्त शुभ कर्म वर्जित; कठोर कर्मों हेतु।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:23 AM
सूर्यास्त06:05 PM
चन्द्रोदय05:00 AM
चन्द्रास्त05:06 PM
चन्द्र राशिकन्या
सूर्य राशिकन्या
अयन · ऋतुदक्षिणायन · वर्षा

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:50 AM – 12:37 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:47 AM – 05:35 AM
अमृत काल02:29 PM – 04:06 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल10:46 AM – 12:14 PM
गुलिक काल07:50 AM – 09:18 AM
यमगण्ड03:09 PM – 04:37 PM
वर्ज्यम्04:52 AM – 06:28 AM
दुर्मुहूर्त11:03 AM – 11:50 AM
दुर्मुहूर्त02:11 PM – 02:57 PM

दिन चौघड़िया

चर06:23 AM – 07:50 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ07:50 AM – 09:18 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत09:18 AM – 10:46 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल10:46 AM – 12:14 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:14 PM – 01:41 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग01:41 PM – 03:09 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:09 PM – 04:37 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर04:37 PM – 06:05 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

रात्रि चौघड़िया

रोग06:05 PM – 07:37 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग07:37 PM – 09:09 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर09:09 PM – 10:41 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ10:41 PM – 12:14 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत12:14 AM – 01:46 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल01:46 AM – 03:18 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ03:18 AM – 04:50 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग04:50 AM – 06:23 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle