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VedicSpaceपंचांगजयपुर › 2027-03-08

जयपुर पंचांग — 8 मार्च 2027

कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि, शतभिषा नक्षत्र · सोमवार · राजस्थान (26.9124°, 75.7873°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949कुम्भ (माघ)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना जयपुर (26.9124°, 75.7873°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:44 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष अमावस्यातक 02:59 PMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारसोमवारयात्रा, जल-द्रव्य, लोक-व्यवहार, शान्ति, माता, कोमल कर्म।
नक्षत्रशतभिषा · पाद 4तक 08:35 AMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगसाध्यतक 02:43 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणनागतक 02:59 PMस्थिर करण — केवल कठोर / क्रूर कर्म।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:44 AM
सूर्यास्त06:32 PM
चन्द्रोदय06:33 AM
चन्द्रास्त06:32 PM
चन्द्र राशिकुम्भ
सूर्य राशिकुम्भ
अयन · ऋतुउत्तरायण · शिशिर

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त05:08 AM – 05:56 AM
अमृत काल

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल08:12 AM – 09:41 AM
गुलिक काल02:06 PM – 03:35 PM
यमगण्ड11:09 AM – 12:38 PM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त12:14 PM – 01:01 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त03:23 PM – 04:10 PM

दिन चौघड़िया

अमृत06:44 AM – 08:12 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल08:12 AM – 09:41 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ09:41 AM – 11:09 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग11:09 AM – 12:38 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग12:38 PM – 02:06 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर02:06 PM – 03:35 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ03:35 PM – 05:03 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत05:03 PM – 06:32 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

रात्रि चौघड़िया

चर06:32 PM – 08:03 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:03 PM – 09:35 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत09:35 PM – 11:06 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल11:06 PM – 12:38 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:38 AM – 02:09 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:09 AM – 03:41 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:41 AM – 05:12 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर05:12 AM – 06:44 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle