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VedicSpaceपंचांगजयपुर › 2027-03-13

जयपुर पंचांग — 13 मार्च 2027

शुक्ल पक्ष पञ्चमी तिथि, भरणी नक्षत्र · शनिवार · राजस्थान (26.9124°, 75.7873°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949कुम्भ (माघ)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना जयपुर (26.9124°, 75.7873°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:39 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष पञ्चमीतक 01:55 PMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारशनिवारश्रम, लोहा, तेल, दीर्घकालिक कार्य — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रभरणी · पाद 4तक 11:03 AMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगवैधृतितक 07:30 PMमहापात योग — समस्त शुभ कर्मों हेतु पूर्णतः वर्जित।
करणबालवतक 01:55 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:39 AM
सूर्यास्त06:34 PM
चन्द्रोदय09:24 AM
चन्द्रास्त11:29 PM
चन्द्र राशिमेष
सूर्य राशिकुम्भ
अयन · ऋतुउत्तरायण · शिशिर

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:12 PM – 01:00 PM
ब्रह्म मुहूर्त05:03 AM – 05:51 AM
अमृत काल06:59 AM – 08:33 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल09:37 AM – 11:07 AM
गुलिक काल06:39 AM – 08:08 AM
यमगण्ड02:05 PM – 03:35 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त09:49 AM – 10:37 AM
दुर्मुहूर्त02:35 PM – 03:23 PM

दिन चौघड़िया

काल06:39 AM – 08:08 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ08:08 AM – 09:37 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:37 AM – 11:07 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग11:07 AM – 12:36 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:36 PM – 02:05 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ02:05 PM – 03:35 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत03:35 PM – 05:04 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल05:04 PM – 06:34 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

लाभ06:34 PM – 08:04 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:04 PM – 09:35 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल09:35 PM – 11:05 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:05 PM – 12:36 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:36 AM – 02:07 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग02:07 AM – 03:37 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:37 AM – 05:08 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ05:08 AM – 06:39 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle