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VedicSpaceपंचांगजयपुर › 2027-05-15

जयपुर पंचांग — 15 मई 2027

शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र · शनिवार · राजस्थान (26.9124°, 75.7873°)

दिन शुद्धि: आंशिक (3/4)विक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949मेष (चैत्र)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना जयपुर (26.9124°, 75.7873°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:39 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष दशमीतक 06:18 PMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारशनिवारश्रम, लोहा, तेल, दीर्घकालिक कार्य — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी · पाद 3तक 12:00 PMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगव्याघाततक 06:33 AMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणतैतिलतक 06:56 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:39 AM
सूर्यास्त07:07 PM
चन्द्रोदय02:26 PM
चन्द्रास्त02:02 AM
चन्द्र राशिसिंह
सूर्य राशिमेष
अयन · ऋतुउत्तरायण · वसन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:56 AM – 12:49 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:03 AM – 04:51 AM
अमृत काल05:24 AM – 06:58 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल09:01 AM – 10:42 AM
गुलिक काल05:39 AM – 07:20 AM
यमगण्ड02:04 PM – 03:45 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त09:14 AM – 10:08 AM
दुर्मुहूर्त02:37 PM – 03:31 PM

दिन चौघड़िया

काल05:39 AM – 07:20 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ07:20 AM – 09:01 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:01 AM – 10:42 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग10:42 AM – 12:23 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:23 PM – 02:04 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ02:04 PM – 03:45 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत03:45 PM – 05:26 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल05:26 PM – 07:07 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

लाभ07:07 PM – 08:26 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:26 PM – 09:45 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल09:45 PM – 11:04 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:04 PM – 12:23 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:23 AM – 01:42 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग01:42 AM – 03:01 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:01 AM – 04:20 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ04:20 AM – 05:39 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle