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VedicSpaceपंचांगकोलकाता › 2027-05-17

कोलकाता पंचांग — 17 मई 2027

शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि, हस्त नक्षत्र · सोमवार · पश्चिम बंगाल (22.5726°, 88.3639°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949वृषभ (वैशाख)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना कोलकाता (22.5726°, 88.3639°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 04:56 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष द्वादशीतक 04:28 PMभद्रा तिथि (पक्ष की 2, 7 और 12) — शुभ एवं सहायक।
वारसोमवारयात्रा, जल-द्रव्य, लोक-व्यवहार, शान्ति, माता, कोमल कर्म।
नक्षत्रहस्त · पाद 4तक 11:29 AMक्षिप्र नक्षत्र — व्यापार, औषधि, विद्या, ललित कला, शीघ्र कार्य।
योगसिद्धितक 01:10 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणबालवतक 04:28 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय04:56 AM
सूर्यास्त06:11 PM
चन्द्रोदय03:27 PM
चन्द्रास्त02:19 AM
चन्द्र राशिकन्या
सूर्य राशिवृषभ
अयन · ऋतुउत्तरायण · वसन्त

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त03:20 AM – 04:08 AM
अमृत काल04:25 AM – 06:01 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल06:35 AM – 08:14 AM
गुलिक काल01:12 PM – 02:52 PM
यमगण्ड09:54 AM – 11:33 AM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त11:07 AM – 12:00 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त02:39 PM – 03:32 PM

दिन चौघड़िया

अमृत04:56 AM – 06:35 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल06:35 AM – 08:14 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ08:14 AM – 09:54 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:54 AM – 11:33 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग11:33 AM – 01:12 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर01:12 PM – 02:52 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ02:52 PM – 04:31 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत04:31 PM – 06:11 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

रात्रि चौघड़िया

चर06:11 PM – 07:31 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ07:31 PM – 08:52 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:52 PM – 10:12 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल10:12 PM – 11:33 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:33 PM – 12:54 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:54 AM – 02:14 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग02:14 AM – 03:35 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:35 AM – 04:56 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle