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VedicSpaceपंचांगलंदन › 2026-10-18

लंदन पंचांग — 18 अक्टूबर 2026

शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र · रविवार · इंग्लैंड (51.5074°, -0.1278°)

दिन शुद्धि: आंशिक (3/4)विक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948तुला (आश्विन)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना लंदन (51.5074°, -0.1278°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 07:29 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष अष्टमीतक 06:22 AMजया तिथि — शुभ एवं सहायक।
वाररविवारअधिकार, शासन, औषधि, पिता, पराक्रम, स्वर्ण।
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा · पाद 4तक 08:19 AMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगसुकर्मातक 07:26 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणविष्टि (भद्रा)तक 05:12 PMभद्रा — समस्त शुभ कर्म वर्जित; कठोर कर्मों हेतु।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय07:29 AM
सूर्यास्त06:01 PM
चन्द्रोदय03:24 PM
चन्द्रास्त10:57 PM
चन्द्र राशिधनु
सूर्य राशितुला
अयन · ऋतुदक्षिणायन · शरद्

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:23 PM – 01:06 PM
ब्रह्म मुहूर्त05:53 AM – 06:41 AM
अमृत काल

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल04:42 PM – 06:01 PM
गुलिक काल03:23 PM – 04:42 PM
यमगण्ड12:45 PM – 02:04 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त04:36 PM – 05:18 PM

दिन चौघड़िया

उद्वेग07:29 AM – 08:48 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर08:48 AM – 10:07 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ10:07 AM – 11:26 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत11:26 AM – 12:45 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:45 PM – 02:04 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ02:04 PM – 03:23 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:23 PM – 04:42 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग04:42 PM – 06:01 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

शुभ06:01 PM – 07:42 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग07:42 PM – 09:23 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग09:23 PM – 11:04 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर11:04 PM – 12:45 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ12:45 AM – 02:26 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत02:26 AM – 04:07 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल04:07 AM – 05:48 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ05:48 AM – 07:29 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle