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VedicSpaceपंचांगलंदन › 2027-08-04

लंदन पंचांग — 4 अगस्त 2027

शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि, मघा नक्षत्र · बुधवार · इंग्लैंड (51.5074°, -0.1278°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949कर्क (आषाढ़)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना लंदन (51.5074°, -0.1278°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:28 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष तृतीयातक 12:39 AMजया तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारबुधवारव्यापार, विद्या, लेखा, संवाद, लघु यात्रा।
नक्षत्रमघा · पाद 4तक 07:06 AMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगपरिघतक 02:18 AMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणतैतिलतक 02:11 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:28 AM
सूर्यास्त08:44 PM
चन्द्रोदय08:21 AM
चन्द्रास्त09:19 PM
चन्द्र राशिसिंह
सूर्य राशिकर्क
अयन · ऋतुदक्षिणायन · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त03:52 AM – 04:40 AM
अमृत काल04:26 AM – 05:51 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल01:06 PM – 03:00 PM
गुलिक काल11:11 AM – 01:06 PM
यमगण्ड07:22 AM – 09:17 AM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त12:35 PM – 01:36 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त09:32 AM – 10:33 AM

दिन चौघड़िया

लाभ05:28 AM – 07:22 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत07:22 AM – 09:17 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल09:17 AM – 11:11 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:11 AM – 01:06 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग01:06 PM – 03:00 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:00 PM – 04:55 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर04:55 PM – 06:49 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ06:49 PM – 08:44 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

रात्रि चौघड़िया

उद्वेग08:44 PM – 09:49 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर09:49 PM – 10:55 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ10:55 PM – 12:00 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत12:00 AM – 01:06 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल01:06 AM – 02:11 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ02:11 AM – 03:17 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:17 AM – 04:22 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग04:22 AM – 05:28 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle