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VedicSpaceपंचांगनासिक › 2026-05-17

नासिक पंचांग — 17 मई 2026

शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि, कृत्तिका नक्षत्र · रविवार · महाराष्ट्र (19.9975°, 73.7898°)

दिन शुद्धि: आंशिक (3/4)विक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948वृषभ (वैशाख)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना नासिक (19.9975°, 73.7898°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:58 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष प्रतिपदातक 09:41 PMनन्दा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वाररविवारअधिकार, शासन, औषधि, पिता, पराक्रम, स्वर्ण।
नक्षत्रकृत्तिका · पाद 3तक 02:32 PMमिश्र नक्षत्र — मिश्रित फल; अग्नि-कर्म एवं नित्य कार्य।
योगशोभनतक 06:15 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणकिंस्तुघ्नतक 11:36 AMस्थिर करण — शुभ, उत्तम आरम्भ का पोषक।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:58 AM
सूर्यास्त07:05 PM
चन्द्रोदय06:04 AM
चन्द्रास्त07:50 PM
चन्द्र राशिवृषभ
सूर्य राशिवृषभ
अयन · ऋतुउत्तरायण · वसन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:05 PM – 12:57 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:22 AM – 05:10 AM
अमृत काल12:24 PM – 01:48 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल05:26 PM – 07:05 PM
गुलिक काल03:48 PM – 05:26 PM
यमगण्ड12:31 PM – 02:09 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त05:20 PM – 06:12 PM

दिन चौघड़िया

उद्वेग05:58 AM – 07:36 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर07:36 AM – 09:14 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:14 AM – 10:53 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:53 AM – 12:31 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:31 PM – 02:09 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ02:09 PM – 03:48 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:48 PM – 05:26 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग05:26 PM – 07:05 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

शुभ07:05 PM – 08:26 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग08:26 PM – 09:48 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग09:48 PM – 11:09 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर11:09 PM – 12:31 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ12:31 AM – 01:53 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत01:53 AM – 03:14 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल03:14 AM – 04:36 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ04:36 AM – 05:58 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle