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VedicSpaceपंचांगप्रयागराज › 2025-08-04

प्रयागराज पंचांग — 4 अगस्त 2025

शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, अनुराधा नक्षत्र · सोमवार · उत्तर प्रदेश (25.4358°, 81.8463°)

दिन शुद्धि: आंशिक (3/4)विक्रम संवत् 2082 (कालयुक्ति)शक संवत् 1947कर्क (आषाढ़)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना प्रयागराज (25.4358°, 81.8463°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:31 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष दशमीतक 11:42 AMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारसोमवारयात्रा, जल-द्रव्य, लोक-व्यवहार, शान्ति, माता, कोमल कर्म।
नक्षत्रअनुराधा · पाद 4तक 09:12 AMमृदु नक्षत्र — विवाह, मैत्री, संगीत, आभूषण, सुख।
योगब्रह्मतक 07:04 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणगरतक 11:42 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:31 AM
सूर्यास्त06:46 PM
चन्द्रोदय02:59 PM
चन्द्रास्त12:28 AM
चन्द्र राशिवृश्चिक
सूर्य राशिकर्क
अयन · ऋतुदक्षिणायन · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त03:55 AM – 04:43 AM
अमृत काल

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल07:10 AM – 08:49 AM
गुलिक काल01:47 PM – 03:27 PM
यमगण्ड10:29 AM – 12:08 PM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त11:42 AM – 12:35 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त03:14 PM – 04:07 PM

दिन चौघड़िया

अमृत05:31 AM – 07:10 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल07:10 AM – 08:49 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ08:49 AM – 10:29 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग10:29 AM – 12:08 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग12:08 PM – 01:47 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर01:47 PM – 03:27 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ03:27 PM – 05:06 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत05:06 PM – 06:46 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

रात्रि चौघड़िया

चर06:46 PM – 08:06 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:06 PM – 09:27 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत09:27 PM – 10:47 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल10:47 PM – 12:08 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:08 AM – 01:29 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग01:29 AM – 02:49 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग02:49 AM – 04:10 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर04:10 AM – 05:31 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle