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VedicSpaceपंचांगप्रयागराज › 2026-12-17

प्रयागराज पंचांग — 17 दिसम्बर 2026

शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र · गुरुवार · उत्तर प्रदेश (25.4358°, 81.8463°)

दिन शुद्धि: आंशिक (3/4)विक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948धनु (मार्गशीर्ष)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना प्रयागराज (25.4358°, 81.8463°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:42 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष अष्टमीतक 11:26 PMजया तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारगुरुवारसर्वाधिक शुभ — विवाह, शिक्षा, धर्म, धन, सन्तान।
नक्षत्रपूर्वाभाद्रपद · पाद 3तक 03:30 PMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगसिद्धितक 01:21 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणविष्टि (भद्रा)तक 11:12 AMभद्रा — समस्त शुभ कर्म वर्जित; कठोर कर्मों हेतु।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:42 AM
सूर्यास्त05:16 PM
चन्द्रोदय12:01 PM
चन्द्रास्त12:24 AM
चन्द्र राशिकुम्भ
सूर्य राशिधनु
अयन · ऋतुदक्षिणायन · हेमन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:37 AM – 12:20 PM
ब्रह्म मुहूर्त05:06 AM – 05:54 AM
अमृत काल07:48 AM – 09:29 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल01:18 PM – 02:37 PM
गुलिक काल09:20 AM – 10:39 AM
यमगण्ड06:42 AM – 08:01 AM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त01:02 PM – 01:44 PM
दुर्मुहूर्त03:51 PM – 04:33 PM

दिन चौघड़िया

शुभ06:42 AM – 08:01 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग08:01 AM – 09:20 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग09:20 AM – 10:39 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर10:39 AM – 11:59 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ11:59 AM – 01:18 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत01:18 PM – 02:37 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल02:37 PM – 03:56 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ03:56 PM – 05:16 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

रात्रि चौघड़िया

अमृत05:16 PM – 06:56 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल06:56 PM – 08:37 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ08:37 PM – 10:18 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग10:18 PM – 11:59 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग11:59 PM – 01:39 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर01:39 AM – 03:20 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ03:20 AM – 05:01 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत05:01 AM – 06:42 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

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अन्य तिथियाँ

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स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle