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VedicSpaceपंचांगप्रयागराज › 2027-05-19

प्रयागराज पंचांग — 19 मई 2027

शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि, स्वाती नक्षत्र · बुधवार · उत्तर प्रदेश (25.4358°, 81.8463°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949वृषभ (वैशाख)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना प्रयागराज (25.4358°, 81.8463°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:16 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष चतुर्दशीतक 04:03 PMरिक्ता तिथि — क्षयकारी; कठोर अथवा नित्य कर्मों हेतु।
वारबुधवारव्यापार, विद्या, लेखा, संवाद, लघु यात्रा।
नक्षत्रस्वाती · पाद 3तक 12:19 PMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगवरीयान्तक 11:00 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणवणिजतक 04:03 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:16 AM
सूर्यास्त06:43 PM
चन्द्रोदय05:56 PM
चन्द्रास्त03:57 AM
चन्द्र राशितुला
सूर्य राशिवृषभ
अयन · ऋतुउत्तरायण · वसन्त

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त03:40 AM – 04:28 AM
अमृत काल

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल11:59 AM – 01:40 PM
गुलिक काल10:18 AM – 11:59 AM
यमगण्ड06:56 AM – 08:37 AM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त11:32 AM – 12:26 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त08:51 AM – 09:45 AM

दिन चौघड़िया

लाभ05:16 AM – 06:56 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत06:56 AM – 08:37 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल08:37 AM – 10:18 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ10:18 AM – 11:59 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग11:59 AM – 01:40 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग01:40 PM – 03:21 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:21 PM – 05:02 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ05:02 PM – 06:43 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

रात्रि चौघड़िया

उद्वेग06:43 PM – 08:02 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर08:02 PM – 09:21 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:21 PM – 10:40 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:40 PM – 11:59 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल11:59 PM – 01:18 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ01:18 AM – 02:37 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:37 AM – 03:56 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:56 AM – 05:16 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle