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VedicSpaceपंचांगराजकोट › 2026-10-05

राजकोट पंचांग — 5 अक्टूबर 2026

कृष्ण पक्ष दशमी तिथि, पुष्य नक्षत्र · सोमवार · गुजरात (22.3039°, 70.8022°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948कन्या (भाद्रपद)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना राजकोट (22.3039°, 70.8022°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:39 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष दशमीतक 02:08 AMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारसोमवारयात्रा, जल-द्रव्य, लोक-व्यवहार, शान्ति, माता, कोमल कर्म।
नक्षत्रपुष्य · पाद 2तक 11:09 PMक्षिप्र नक्षत्र — व्यापार, औषधि, विद्या, ललित कला, शीघ्र कार्य।
योगशिवतक 09:51 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणवणिजतक 02:59 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:39 AM
सूर्यास्त06:31 PM
चन्द्रोदय01:21 AM
चन्द्रास्त02:58 PM
चन्द्र राशिकर्क
सूर्य राशिकन्या
अयन · ऋतुदक्षिणायन · वर्षा

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त05:03 AM – 05:51 AM
अमृत काल05:41 PM – 07:13 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल08:08 AM – 09:37 AM
गुलिक काल02:04 PM – 03:33 PM
यमगण्ड11:06 AM – 12:35 PM
वर्ज्यम्08:30 AM – 10:02 AM
अभिजित मुहूर्त12:11 PM – 12:58 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त03:21 PM – 04:08 PM

दिन चौघड़िया

अमृत06:39 AM – 08:08 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल08:08 AM – 09:37 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ09:37 AM – 11:06 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग11:06 AM – 12:35 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग12:35 PM – 02:04 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर02:04 PM – 03:33 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ03:33 PM – 05:02 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत05:02 PM – 06:31 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

रात्रि चौघड़िया

चर06:31 PM – 08:02 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:02 PM – 09:33 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत09:33 PM – 11:04 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल11:04 PM – 12:35 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:35 AM – 02:06 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:06 AM – 03:37 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:37 AM – 05:08 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर05:08 AM – 06:39 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle