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VedicSpaceपंचांगराजकोट › 2026-11-18

राजकोट पंचांग — 18 नवम्बर 2026

शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि, शतभिषा नक्षत्र · बुधवार · गुजरात (22.3039°, 70.8022°)

दिन शुद्धि: आंशिक (3/4)विक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948वृश्चिक (कार्तिक)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना राजकोट (22.3039°, 70.8022°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 07:01 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष अष्टमीतक 06:05 AMजया तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारबुधवारव्यापार, विद्या, लेखा, संवाद, लघु यात्रा।
नक्षत्रशतभिषा · पाद 1तक 06:10 AMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगध्रुवतक 08:05 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणबवतक 06:05 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय07:01 AM
सूर्यास्त06:03 PM
चन्द्रोदय01:44 PM
चन्द्रास्त12:40 AM
चन्द्र राशिकुम्भ
सूर्य राशिवृश्चिक
अयन · ऋतुदक्षिणायन · शरद्

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त05:25 AM – 06:13 AM
अमृत काल11:31 PM – 01:13 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल12:32 PM – 01:54 PM
गुलिक काल11:09 AM – 12:32 PM
यमगण्ड08:23 AM – 09:46 AM
वर्ज्यम्01:17 PM – 02:59 PM
अभिजित मुहूर्त12:09 PM – 12:54 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त09:57 AM – 10:41 AM

दिन चौघड़िया

लाभ07:01 AM – 08:23 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:23 AM – 09:46 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल09:46 AM – 11:09 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:09 AM – 12:32 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:32 PM – 01:54 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग01:54 PM – 03:17 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:17 PM – 04:40 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ04:40 PM – 06:03 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

रात्रि चौघड़िया

उद्वेग06:03 PM – 07:40 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर07:40 PM – 09:17 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:17 PM – 10:54 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:54 PM – 12:32 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:32 AM – 02:09 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ02:09 AM – 03:46 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:46 AM – 05:23 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग05:23 AM – 07:01 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle