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VedicSpaceपंचांगराजकोट › 2027-04-12

राजकोट पंचांग — 12 अप्रैल 2027

शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि, मृगशिरा नक्षत्र · सोमवार · गुजरात (22.3039°, 70.8022°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949मीन (फाल्गुन)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना राजकोट (22.3039°, 70.8022°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:30 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष षष्ठीतक 07:35 PMनन्दा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारसोमवारयात्रा, जल-द्रव्य, लोक-व्यवहार, शान्ति, माता, कोमल कर्म।
नक्षत्रमृगशिरा · पाद 3तक 01:34 PMमृदु नक्षत्र — विवाह, मैत्री, संगीत, आभूषण, सुख।
योगशोभनतक 04:48 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणकौलवतक 08:38 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:30 AM
सूर्यास्त07:06 PM
चन्द्रोदय10:38 AM
चन्द्रास्त12:39 AM
चन्द्र राशिमिथुन
सूर्य राशिमीन
अयन · ऋतुउत्तरायण · शिशिर

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त04:54 AM – 05:42 AM
अमृत काल05:45 AM – 07:16 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल08:04 AM – 09:39 AM
गुलिक काल02:22 PM – 03:57 PM
यमगण्ड11:13 AM – 12:48 PM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त12:22 PM – 01:13 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त03:44 PM – 04:34 PM

दिन चौघड़िया

अमृत06:30 AM – 08:04 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल08:04 AM – 09:39 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ09:39 AM – 11:13 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग11:13 AM – 12:48 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग12:48 PM – 02:22 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर02:22 PM – 03:57 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ03:57 PM – 05:31 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत05:31 PM – 07:06 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

रात्रि चौघड़िया

चर07:06 PM – 08:31 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:31 PM – 09:57 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत09:57 PM – 11:22 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल11:22 PM – 12:48 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:48 AM – 02:13 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:13 AM – 03:39 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:39 AM – 05:04 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर05:04 AM – 06:30 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle