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VedicSpaceपंचांगऋषिकेश › 2027-06-04

ऋषिकेश पंचांग — 4 जून 2027

कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि, कृत्तिका नक्षत्र · शुक्रवार · उत्तराखंड (30.0869°, 78.2676°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949वृषभ (वैशाख)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना ऋषिकेश (30.0869°, 78.2676°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:15 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष अमावस्यातक 01:10 AMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारशुक्रवारकला, संगीत, विवाह, वाहन, ऐश्वर्य, सुख।
नक्षत्रकृत्तिका · पाद 4तक 09:14 AMमिश्र नक्षत्र — मिश्रित फल; अग्नि-कर्म एवं नित्य कार्य।
योगसुकर्मातक 03:46 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणचतुष्पादतक 02:40 PMस्थिर करण — गोधन, स्थिर कार्य; शुभ आरम्भ हेतु मन्द।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:15 AM
सूर्यास्त07:15 PM
चन्द्रोदय04:23 AM
चन्द्रास्त06:59 PM
चन्द्र राशिवृषभ
सूर्य राशिवृषभ
अयन · ऋतुउत्तरायण · वसन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:47 AM – 12:43 PM
ब्रह्म मुहूर्त03:39 AM – 04:27 AM
अमृत काल06:17 AM – 07:45 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल10:30 AM – 12:15 PM
गुलिक काल07:00 AM – 08:45 AM
यमगण्ड03:45 PM – 05:30 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त10:51 AM – 11:47 AM
दुर्मुहूर्त02:35 PM – 03:31 PM

दिन चौघड़िया

चर05:15 AM – 07:00 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ07:00 AM – 08:45 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:45 AM – 10:30 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल10:30 AM – 12:15 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:15 PM – 02:00 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:00 PM – 03:45 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:45 PM – 05:30 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर05:30 PM – 07:15 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

रात्रि चौघड़िया

रोग07:15 PM – 08:30 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग08:30 PM – 09:45 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर09:45 PM – 11:00 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ11:00 PM – 12:15 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत12:15 AM – 01:30 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल01:30 AM – 02:45 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ02:45 AM – 04:00 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग04:00 AM – 05:15 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle