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VedicSpaceपंचांगश्रीनगर › 2026-06-21

श्रीनगर पंचांग — 21 जून 2026

शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र · रविवार · जम्मू-कश्मीर (34.0837°, 74.7973°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948मिथुन (ज्येष्ठ)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना श्रीनगर (34.0837°, 74.7973°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:19 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष सप्तमीतक 03:21 PMभद्रा तिथि (पक्ष की 2, 7 और 12) — शुभ एवं सहायक।
वाररविवारअधिकार, शासन, औषधि, पिता, पराक्रम, स्वर्ण।
नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी · पाद 4तक 09:31 AMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगसिद्धितक 11:21 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणवणिजतक 03:21 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:19 AM
सूर्यास्त07:46 PM
चन्द्रोदय12:02 PM
चन्द्रास्त12:14 AM
चन्द्र राशिसिंह
सूर्य राशिमिथुन
अयन · ऋतुउत्तरायण · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:03 PM – 01:01 PM
ब्रह्म मुहूर्त03:43 AM – 04:31 AM
अमृत काल

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल05:57 PM – 07:46 PM
गुलिक काल04:09 PM – 05:57 PM
यमगण्ड12:32 PM – 02:20 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त05:50 PM – 06:48 PM

दिन चौघड़िया

उद्वेग05:19 AM – 07:07 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर07:07 AM – 08:55 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:55 AM – 10:44 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:44 AM – 12:32 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:32 PM – 02:20 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ02:20 PM – 04:09 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग04:09 PM – 05:57 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग05:57 PM – 07:46 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

शुभ07:46 PM – 08:57 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग08:57 PM – 10:09 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग10:09 PM – 11:20 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर11:20 PM – 12:32 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ12:32 AM – 01:44 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत01:44 AM – 02:55 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल02:55 AM – 04:07 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ04:07 AM – 05:19 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle