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VedicSpaceपंचांगश्रीनगर › 2026-08-01

श्रीनगर पंचांग — 1 अगस्त 2026

कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि, शतभिषा नक्षत्र · शनिवार · जम्मू-कश्मीर (34.0837°, 74.7973°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948कर्क (आषाढ़)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना श्रीनगर (34.0837°, 74.7973°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:42 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष तृतीयातक 11:07 PMजया तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारशनिवारश्रम, लोहा, तेल, दीर्घकालिक कार्य — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रशतभिषा · पाद 2तक 08:45 PMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगशोभनतक 11:23 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणवणिजतक 10:53 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:42 AM
सूर्यास्त07:32 PM
चन्द्रोदय09:08 PM
चन्द्रास्त08:01 AM
चन्द्र राशिकुम्भ
सूर्य राशिकर्क
अयन · ऋतुदक्षिणायन · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:09 PM – 01:04 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:06 AM – 04:54 AM
अमृत काल12:53 PM – 02:34 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल09:09 AM – 10:53 AM
गुलिक काल05:42 AM – 07:25 AM
यमगण्ड02:20 PM – 04:04 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त09:23 AM – 10:18 AM
दुर्मुहूर्त02:55 PM – 03:50 PM

दिन चौघड़िया

काल05:42 AM – 07:25 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ07:25 AM – 09:09 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:09 AM – 10:53 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग10:53 AM – 12:37 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:37 PM – 02:20 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ02:20 PM – 04:04 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत04:04 PM – 05:48 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल05:48 PM – 07:32 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

लाभ07:32 PM – 08:48 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:48 PM – 10:04 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल10:04 PM – 11:20 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:20 PM – 12:37 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:37 AM – 01:53 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग01:53 AM – 03:09 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:09 AM – 04:25 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ04:25 AM – 05:42 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle