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VedicSpaceपंचांगश्रीनगर › 2026-10-04

श्रीनगर पंचांग — 4 अक्टूबर 2026

कृष्ण पक्ष नवमी तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र · रविवार · जम्मू-कश्मीर (34.0837°, 74.7973°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948कन्या (भाद्रपद)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना श्रीनगर (34.0837°, 74.7973°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:27 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष नवमीतक 03:54 AMरिक्ता तिथि — क्षयकारी; कठोर अथवा नित्य कर्मों हेतु।
वाररविवारअधिकार, शासन, औषधि, पिता, पराक्रम, स्वर्ण।
नक्षत्रपुनर्वसु · पाद 1तक 12:14 AMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगपरिघतक 12:32 PMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणतैतिलतक 04:51 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:27 AM
सूर्यास्त06:12 PM
चन्द्रोदय12:36 AM
चन्द्रास्त02:22 PM
चन्द्र राशिमिथुन
सूर्य राशिकन्या
अयन · ऋतुदक्षिणायन · वर्षा

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:56 AM – 12:43 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:51 AM – 05:39 AM
अमृत काल10:24 PM – 11:55 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल04:43 PM – 06:12 PM
गुलिक काल03:15 PM – 04:43 PM
यमगण्ड12:19 PM – 01:47 PM
वर्ज्यम्01:18 PM – 02:49 PM
दुर्मुहूर्त04:38 PM – 05:25 PM

दिन चौघड़िया

उद्वेग06:27 AM – 07:55 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर07:55 AM – 09:23 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:23 AM – 10:51 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:51 AM – 12:19 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:19 PM – 01:47 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ01:47 PM – 03:15 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:15 PM – 04:43 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग04:43 PM – 06:12 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

शुभ06:12 PM – 07:43 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग07:43 PM – 09:15 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग09:15 PM – 10:47 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर10:47 PM – 12:19 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ12:19 AM – 01:51 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत01:51 AM – 03:23 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल03:23 AM – 04:55 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ04:55 AM – 06:27 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle