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VedicSpaceपंचांगश्रीनगर › 2027-02-04

श्रीनगर पंचांग — 4 फ़रवरी 2027

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र · गुरुवार · जम्मू-कश्मीर (34.0837°, 74.7973°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949मकर (पौष)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना श्रीनगर (34.0837°, 74.7973°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 07:26 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष त्रयोदशीतक 04:31 PMजया तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारगुरुवारसर्वाधिक शुभ — विवाह, शिक्षा, धर्म, धन, सन्तान।
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा · पाद 3तक 03:32 PMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगवज्रतक 07:41 PMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणवणिजतक 04:31 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय07:26 AM
सूर्यास्त06:04 PM
चन्द्रोदय06:07 AM
चन्द्रास्त03:50 PM
चन्द्र राशिधनु
सूर्य राशिमकर
अयन · ऋतुउत्तरायण · हेमन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:23 PM – 01:06 PM
ब्रह्म मुहूर्त05:50 AM – 06:38 AM
अमृत काल11:33 AM – 01:21 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल02:04 PM – 03:24 PM
गुलिक काल10:05 AM – 11:25 AM
यमगण्ड07:26 AM – 08:45 AM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त01:48 PM – 02:31 PM
दुर्मुहूर्त04:38 PM – 05:21 PM

दिन चौघड़िया

शुभ07:26 AM – 08:45 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग08:45 AM – 10:05 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग10:05 AM – 11:25 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर11:25 AM – 12:45 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ12:45 PM – 02:04 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत02:04 PM – 03:24 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल03:24 PM – 04:44 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ04:44 PM – 06:04 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

रात्रि चौघड़िया

अमृत06:04 PM – 07:44 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल07:44 PM – 09:24 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ09:24 PM – 11:04 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग11:04 PM – 12:45 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग12:45 AM – 02:25 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर02:25 AM – 04:05 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ04:05 AM – 05:45 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत05:45 AM – 07:26 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle