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VedicSpaceपंचांगश्रीनगर › 2027-05-18

श्रीनगर पंचांग — 18 मई 2027

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि, चित्रा नक्षत्र · मङ्गलवार · जम्मू-कश्मीर (34.0837°, 74.7973°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949वृषभ (वैशाख)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना श्रीनगर (34.0837°, 74.7973°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:27 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष त्रयोदशीतक 04:04 PMजया तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारमङ्गलवारपराक्रम, शल्य-चिकित्सा, भूमि, विवाद — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रचित्रा · पाद 4तक 11:43 AMमृदु नक्षत्र — विवाह, मैत्री, संगीत, आभूषण, सुख।
योगव्यतीपाततक 11:55 PMमहापात योग — समस्त शुभ कर्मों हेतु पूर्णतः वर्जित।
करणतैतिलतक 04:04 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:27 AM
सूर्यास्त07:28 PM
चन्द्रोदय05:42 PM
चन्द्रास्त03:35 AM
चन्द्र राशितुला
सूर्य राशिवृषभ
अयन · ऋतुउत्तरायण · वसन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:59 AM – 12:55 PM
ब्रह्म मुहूर्त03:51 AM – 04:39 AM
अमृत काल04:40 AM – 06:17 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल03:57 PM – 05:42 PM
गुलिक काल12:27 PM – 02:12 PM
यमगण्ड08:57 AM – 10:42 AM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त11:03 AM – 11:59 AM
दुर्मुहूर्त02:47 PM – 03:43 PM

दिन चौघड़िया

रोग05:27 AM – 07:12 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग07:12 AM – 08:57 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर08:57 AM – 10:42 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ10:42 AM – 12:27 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत12:27 PM – 02:12 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल02:12 PM – 03:57 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ03:57 PM – 05:42 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग05:42 PM – 07:28 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

काल07:28 PM – 08:42 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ08:42 PM – 09:57 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:57 PM – 11:12 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग11:12 PM – 12:27 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:27 AM – 01:42 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ01:42 AM – 02:57 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत02:57 AM – 04:12 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल04:12 AM – 05:27 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle