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VedicSpaceपंचांगतिरुपति › 2026-10-15

तिरुपति पंचांग — 15 अक्टूबर 2026

शुक्ल पक्ष पञ्चमी तिथि, ज्येष्ठा नक्षत्र · गुरुवार · आंध्र प्रदेश (13.6288°, 79.4192°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948कन्या (भाद्रपद)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना तिरुपति (13.6288°, 79.4192°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:03 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष पञ्चमीतक 03:25 AMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारगुरुवारसर्वाधिक शुभ — विवाह, शिक्षा, धर्म, धन, सन्तान।
नक्षत्रज्येष्ठा · पाद 1तक 06:47 AMतीक्ष्ण नक्षत्र — अभिचार, संघर्ष, सम्बन्ध-विच्छेद — शुभ कर्म वर्जित।
योगसौभाग्यतक 09:15 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणबवतक 02:16 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:03 AM
सूर्यास्त05:53 PM
चन्द्रोदय09:58 AM
चन्द्रास्त09:15 PM
चन्द्र राशिवृश्चिक
सूर्य राशिकन्या
अयन · ऋतुदक्षिणायन · वर्षा

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:34 AM – 12:21 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:27 AM – 05:15 AM
अमृत काल09:02 PM – 10:49 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल01:26 PM – 02:55 PM
गुलिक काल09:00 AM – 10:29 AM
यमगण्ड06:03 AM – 07:31 AM
वर्ज्यम्10:20 AM – 12:07 PM
दुर्मुहूर्त01:09 PM – 01:56 PM
दुर्मुहूर्त04:18 PM – 05:05 PM

दिन चौघड़िया

शुभ06:03 AM – 07:31 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग07:31 AM – 09:00 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग09:00 AM – 10:29 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर10:29 AM – 11:58 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ11:58 AM – 01:26 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत01:26 PM – 02:55 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल02:55 PM – 04:24 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ04:24 PM – 05:53 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

रात्रि चौघड़िया

अमृत05:53 PM – 07:24 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल07:24 PM – 08:55 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ08:55 PM – 10:26 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग10:26 PM – 11:58 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग11:58 PM – 01:29 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर01:29 AM – 03:00 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ03:00 AM – 04:31 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत04:31 AM – 06:03 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle