ज्येष्ठा नक्षत्र — देवता, पाद, नक्षत्र स्वामी और त्याज्य

ज्येष्ठा सत्ताईस नक्षत्रों में अठारहवाँ है। इसके अधिष्ठातृ देवता Indra, विंशोत्तरी स्वामी Mercury, गण Rakshasa, योनि Deer, नाड़ी Aadi, वर्ण Servant — प्रत्येक मान उसी इंजन से गणित जो कुण्डली बनाता है, और शास्त्र से उद्धृत।

एक दृष्टि में

अधिष्ठातृ देवताIndra
नक्षत्र स्वामीMercury
स्वभाव (मुहूर्त वर्ग)Tikshna (Sharp/Fierce)
गणRakshasa
योनिDeer
नाड़ीAadi
वर्णServant

ज्येष्ठा के चार पाद — नवांश और नाम-अक्षर

पादआरम्भनाम-अक्षरनवांश (D9)नवांश स्वामी
Pāda 1226°40′«No»SagittariusJupiter
Pāda 2230°00′«Yaa»CapricornSaturn
Pāda 3233°20′«Yee»AquariusSaturn
Pāda 4236°40′«Yoo»PiscesJupiter

विष घटी (त्याज्य)

ज्येष्ठा का विष (त्याज्य) भाग नक्षत्र के आरम्भ से घटी 14–18 तक रहता है — यही दैनिक वर्ज्य काल का आधार है।

देवता बृहत् पाराशर होराशास्त्र अध्याय ६ से; गण/नाड़ी/वर्ण/योनि अष्टकूट तालिकाओं से; नाम-अक्षर नामकरण तालिका से; नवांश मानक पाराशरी विभाजन से; त्याज्य प्रश्न मार्ग से।