पञ्चाङ्ग · सन्दर्भ27 नक्षत्र
चन्द्रमा के सत्ताईस भवन, एक-एक करके — विंशोत्तरी स्वामी, गुण-मिलान के स्वभाव, नामाक्षर, मुहूर्त चिन्तामणि का सप्तविध वर्गीकरण, और हर नक्षत्र की विष-घटी (त्याज्य) अवधि। नीचे का हर स्तम्भ उन्हीं इंजन-तालिकाओं से आता है जो आपकी कुण्डली, मिलान और दैनिक वर्ज्यम् की गणना करती हैं — कुछ भी स्मृति से नहीं लिखा गया।
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सभी 27 नक्षत्र: विंशोत्तरी स्वामी, गण, नाड़ी, वर्ण, योनि, पाद के नाम-अक्षर, मुहूर्त चिंतामणि के वर्ग और त्याज्य काल — गणित और प्रमाण-सहित।