VedicSpace · वेधशाला

VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2026-11-21

द्वारका पंचांग — 21 नवम्बर 2026

शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र · शनिवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: आंशिक (1/4)विक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948वृश्चिक (कार्तिक)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 07:10 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष एकादशीतक 06:31 AMनन्दा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारशनिवारश्रम, लोहा, तेल, दीर्घकालिक कार्य — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रउत्तराभाद्रपद · पाद 4तक 06:50 AMस्थिर नक्षत्र — गृह-प्रवेश, रोपण, राज्याभिषेक, दीर्घकालिक एवं स्थायी कर्म।
योगसिद्धितक 02:30 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणविष्टि (भद्रा)तक 06:31 AMभद्रा — समस्त शुभ कर्म वर्जित; कठोर कर्मों हेतु।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय07:10 AM
सूर्यास्त06:10 PM
चन्द्रोदय03:33 PM
चन्द्रास्त03:29 AM
चन्द्र राशिमीन
सूर्य राशिवृश्चिक
अयन · ऋतुदक्षिणायन · शरद्

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:18 PM – 01:02 PM
ब्रह्म मुहूर्त05:34 AM – 06:22 AM
अमृत काल

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल09:55 AM – 11:17 AM
गुलिक काल07:10 AM – 08:32 AM
यमगण्ड02:02 PM – 03:25 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त10:06 AM – 10:50 AM
दुर्मुहूर्त02:30 PM – 03:14 PM

दिन चौघड़िया

काल07:10 AM – 08:32 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ08:32 AM – 09:55 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:55 AM – 11:17 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग11:17 AM – 12:40 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:40 PM – 02:02 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ02:02 PM – 03:25 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत03:25 PM – 04:47 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल04:47 PM – 06:10 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

लाभ06:10 PM – 07:47 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत07:47 PM – 09:25 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल09:25 PM – 11:02 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:02 PM – 12:40 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:40 AM – 02:17 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग02:17 AM – 03:55 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:55 AM – 05:32 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ05:32 AM – 07:10 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

लाइव पञ्चाङ्ग ऐप खोलें →

अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle