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VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2026-12-01

द्वारका पंचांग — 1 दिसम्बर 2026

कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि, मघा नक्षत्र · मङ्गलवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948वृश्चिक (कार्तिक)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 07:16 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष अष्टमीतक 11:14 PMजया तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारमङ्गलवारपराक्रम, शल्य-चिकित्सा, भूमि, विवाद — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रमघा · पाद 4तक 09:00 AMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगवैधृतितक 12:15 PMमहापात योग — समस्त शुभ कर्मों हेतु पूर्णतः वर्जित।
करणबालवतक 11:38 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय07:16 AM
सूर्यास्त06:10 PM
चन्द्रोदय12:21 AM
चन्द्रास्त01:03 PM
चन्द्र राशिसिंह
सूर्य राशिवृश्चिक
अयन · ऋतुदक्षिणायन · शरद्

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:21 PM – 01:04 PM
ब्रह्म मुहूर्त05:40 AM – 06:28 AM
अमृत काल07:55 AM – 09:29 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल03:26 PM – 04:48 PM
गुलिक काल12:43 PM – 02:04 PM
यमगण्ड09:59 AM – 11:21 AM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त11:37 AM – 12:21 PM
दुर्मुहूर्त02:32 PM – 03:15 PM

दिन चौघड़िया

रोग07:16 AM – 08:37 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग08:37 AM – 09:59 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर09:59 AM – 11:21 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ11:21 AM – 12:43 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत12:43 PM – 02:04 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल02:04 PM – 03:26 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ03:26 PM – 04:48 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग04:48 PM – 06:10 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

काल06:10 PM – 07:48 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ07:48 PM – 09:26 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:26 PM – 11:04 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग11:04 PM – 12:43 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:43 AM – 02:21 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ02:21 AM – 03:59 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत03:59 AM – 05:37 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल05:37 AM – 07:16 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle