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VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2026-12-14

द्वारका पंचांग — 14 दिसम्बर 2026

शुक्ल पक्ष पञ्चमी तिथि, श्रवण नक्षत्र · सोमवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948वृश्चिक (कार्तिक)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 07:25 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष पञ्चमीतक 07:16 PMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारसोमवारयात्रा, जल-द्रव्य, लोक-व्यवहार, शान्ति, माता, कोमल कर्म।
नक्षत्रश्रवण · पाद 4तक 09:12 AMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगव्याघाततक 01:04 PMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणबवतक 06:04 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय07:25 AM
सूर्यास्त06:13 PM
चन्द्रोदय11:17 AM
चन्द्रास्त10:40 PM
चन्द्र राशिमकर
सूर्य राशिवृश्चिक
अयन · ऋतुदक्षिणायन · शरद्

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त05:49 AM – 06:37 AM
अमृत काल

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल08:46 AM – 10:07 AM
गुलिक काल02:10 PM – 03:31 PM
यमगण्ड11:28 AM – 12:49 PM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त12:27 PM – 01:10 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त03:20 PM – 04:03 PM

दिन चौघड़िया

अमृत07:25 AM – 08:46 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल08:46 AM – 10:07 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ10:07 AM – 11:28 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग11:28 AM – 12:49 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग12:49 PM – 02:10 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर02:10 PM – 03:31 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ03:31 PM – 04:52 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत04:52 PM – 06:13 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

रात्रि चौघड़िया

चर06:13 PM – 07:52 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ07:52 PM – 09:31 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत09:31 PM – 11:10 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल11:10 PM – 12:49 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:49 AM – 02:28 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:28 AM – 04:07 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग04:07 AM – 05:46 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर05:46 AM – 07:25 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle