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VedicSpaceपंचांगद्वारका › 2027-02-11

द्वारका पंचांग — 11 फ़रवरी 2027

शुक्ल पक्ष पञ्चमी तिथि, रेवती नक्षत्र · गुरुवार · गुजरात (22.2442°, 68.9685°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949मकर (पौष)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना द्वारका (22.2442°, 68.9685°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 07:28 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष पञ्चमीतक 03:18 AMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारगुरुवारसर्वाधिक शुभ — विवाह, शिक्षा, धर्म, धन, सन्तान।
नक्षत्ररेवती · पाद 1तक 05:42 AMमृदु नक्षत्र — विवाह, मैत्री, संगीत, आभूषण, सुख।
योगसाध्यतक 08:20 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणबवतक 03:15 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय07:28 AM
सूर्यास्त06:49 PM
चन्द्रोदय10:02 AM
चन्द्रास्त10:53 PM
चन्द्र राशिमीन
सूर्य राशिमकर
अयन · ऋतुउत्तरायण · हेमन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:45 PM – 01:31 PM
ब्रह्म मुहूर्त05:52 AM – 06:40 AM
अमृत काल04:41 AM – 06:20 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल02:33 PM – 03:58 PM
गुलिक काल10:18 AM – 11:43 AM
यमगण्ड07:28 AM – 08:53 AM
वर्ज्यम्06:47 PM – 08:26 PM
दुर्मुहूर्त02:16 PM – 03:02 PM
दुर्मुहूर्त05:18 PM – 06:03 PM

दिन चौघड़िया

शुभ07:28 AM – 08:53 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग08:53 AM – 10:18 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग10:18 AM – 11:43 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर11:43 AM – 01:08 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ01:08 PM – 02:33 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत02:33 PM – 03:58 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल03:58 PM – 05:23 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ05:23 PM – 06:49 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

रात्रि चौघड़िया

अमृत06:49 PM – 08:23 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल08:23 PM – 09:58 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ09:58 PM – 11:33 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग11:33 PM – 01:08 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग01:08 AM – 02:43 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर02:43 AM – 04:18 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ04:18 AM – 05:53 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत05:53 AM – 07:28 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle