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VedicSpaceपंचांगहरिद्वार › 2027-05-11

हरिद्वार पंचांग — 11 मई 2027

शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि, पुनर्वसु नक्षत्र · मङ्गलवार · उत्तराखंड (29.9457°, 78.1642°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949मेष (चैत्र)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना हरिद्वार (29.9457°, 78.1642°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:27 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष षष्ठीतक 01:24 AMनन्दा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारमङ्गलवारपराक्रम, शल्य-चिकित्सा, भूमि, विवाद — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रपुनर्वसु · पाद 3तक 04:26 PMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगशूलतक 05:00 PMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणकौलवतक 02:34 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:27 AM
सूर्यास्त07:01 PM
चन्द्रोदय09:54 AM
चन्द्रास्त12:04 AM
चन्द्र राशिमिथुन
सूर्य राशिमेष
अयन · ऋतुउत्तरायण · वसन्त

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:46 AM – 12:41 PM
ब्रह्म मुहूर्त03:51 AM – 04:39 AM
अमृत काल01:39 PM – 03:08 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल03:37 PM – 05:19 PM
गुलिक काल12:14 PM – 01:55 PM
यमगण्ड08:50 AM – 10:32 AM
वर्ज्यम्04:42 AM – 06:12 AM
दुर्मुहूर्त10:52 AM – 11:46 AM
दुर्मुहूर्त02:29 PM – 03:23 PM

दिन चौघड़िया

रोग05:27 AM – 07:08 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग07:08 AM – 08:50 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर08:50 AM – 10:32 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ10:32 AM – 12:14 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत12:14 PM – 01:55 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल01:55 PM – 03:37 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ03:37 PM – 05:19 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग05:19 PM – 07:01 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

काल07:01 PM – 08:19 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ08:19 PM – 09:37 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:37 PM – 10:55 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग10:55 PM – 12:14 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:14 AM – 01:32 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ01:32 AM – 02:50 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत02:50 AM – 04:08 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल04:08 AM – 05:27 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle