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VedicSpaceपंचांगजयपुर › 2026-11-04

जयपुर पंचांग — 4 नवम्बर 2026

कृष्ण पक्ष दशमी तिथि, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र · बुधवार · राजस्थान (26.9124°, 75.7873°)

दिन शुद्धि: आंशिक (3/4)विक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948तुला (आश्विन)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना जयपुर (26.9124°, 75.7873°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:38 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष दशमीतक 11:03 AMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारबुधवारव्यापार, विद्या, लेखा, संवाद, लघु यात्रा।
नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी · पाद 1तक 03:30 AMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगब्रह्मतक 08:01 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणविष्टि (भद्रा)तक 11:03 AMभद्रा — समस्त शुभ कर्म वर्जित; कठोर कर्मों हेतु।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:38 AM
सूर्यास्त05:42 PM
चन्द्रोदय01:54 AM
चन्द्रास्त02:36 PM
चन्द्र राशिसिंह
सूर्य राशितुला
अयन · ऋतुदक्षिणायन · शरद्

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त05:02 AM – 05:50 AM
अमृत काल09:43 PM – 11:19 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल12:10 PM – 01:33 PM
गुलिक काल10:47 AM – 12:10 PM
यमगण्ड08:01 AM – 09:24 AM
वर्ज्यम्12:05 PM – 01:41 PM
अभिजित मुहूर्त11:47 AM – 12:32 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त09:35 AM – 10:19 AM

दिन चौघड़िया

लाभ06:38 AM – 08:01 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:01 AM – 09:24 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल09:24 AM – 10:47 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ10:47 AM – 12:10 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:10 PM – 01:33 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग01:33 PM – 02:56 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर02:56 PM – 04:19 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ04:19 PM – 05:42 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

रात्रि चौघड़िया

उद्वेग05:42 PM – 07:19 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर07:19 PM – 08:56 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:56 PM – 10:33 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:33 PM – 12:10 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:10 AM – 01:47 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ01:47 AM – 03:24 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:24 AM – 05:01 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग05:01 AM – 06:38 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle