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VedicSpaceपंचांगकोलकाता › 2026-10-11

कोलकाता पंचांग — 11 अक्टूबर 2026

शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि, चित्रा नक्षत्र · रविवार · पश्चिम बंगाल (22.5726°, 88.3639°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948कन्या (भाद्रपद)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना कोलकाता (22.5726°, 88.3639°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:31 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष प्रतिपदातक 09:31 PMनन्दा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वाररविवारअधिकार, शासन, औषधि, पिता, पराक्रम, स्वर्ण।
नक्षत्रचित्रा · पाद 2तक 10:32 PMमृदु नक्षत्र — विवाह, मैत्री, संगीत, आभूषण, सुख।
योगवैधृतितक 09:05 PMमहापात योग — समस्त शुभ कर्मों हेतु पूर्णतः वर्जित।
करणकिंस्तुघ्नतक 09:22 AMस्थिर करण — शुभ, उत्तम आरम्भ का पोषक।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:31 AM
सूर्यास्त05:15 PM
चन्द्रोदय05:58 AM
चन्द्रास्त05:25 PM
चन्द्र राशिकन्या
सूर्य राशिकन्या
अयन · ऋतुदक्षिणायन · वर्षा

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त10:59 AM – 11:46 AM
ब्रह्म मुहूर्त03:55 AM – 04:43 AM
अमृत काल03:25 PM – 05:04 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल03:47 PM – 05:15 PM
गुलिक काल02:19 PM – 03:47 PM
यमगण्ड11:23 AM – 12:51 PM
वर्ज्यम्05:27 AM – 07:06 AM
दुर्मुहूर्त03:41 PM – 04:28 PM

दिन चौघड़िया

उद्वेग05:31 AM – 06:59 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर06:59 AM – 08:27 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:27 AM – 09:55 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत09:55 AM – 11:23 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल11:23 AM – 12:51 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ12:51 PM – 02:19 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग02:19 PM – 03:47 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग03:47 PM – 05:15 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

शुभ05:15 PM – 06:47 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग06:47 PM – 08:19 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग08:19 PM – 09:51 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर09:51 PM – 11:23 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ11:23 PM – 12:55 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत12:55 AM – 02:27 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल02:27 AM – 03:59 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ03:59 AM – 05:31 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle