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VedicSpaceपंचांगकुआलालंपुर › 2026-10-21

कुआलालंपुर पंचांग — 21 अक्टूबर 2026

शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, धनिष्ठा नक्षत्र · बुधवार · (3.139°, 101.6869°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948तुला (आश्विन)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना कुआलालंपुर (3.139°, 101.6869°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:57 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिशुक्ल पक्ष दशमीतक 04:42 PMपूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक।
वारबुधवारव्यापार, विद्या, लेखा, संवाद, लघु यात्रा।
नक्षत्रधनिष्ठा · पाद 2तक 10:18 PMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगगण्डतक 03:03 AMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणगरतक 04:42 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय06:57 AM
सूर्यास्त06:59 PM
चन्द्रोदय03:19 PM
चन्द्रास्त02:42 AM
चन्द्र राशिमकर
सूर्य राशितुला
अयन · ऋतुदक्षिणायन · शरद्

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त05:21 AM – 06:09 AM
अमृत काल12:08 PM – 01:51 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल12:58 PM – 02:28 PM
गुलिक काल11:27 AM – 12:58 PM
यमगण्ड08:27 AM – 09:57 AM
वर्ज्यम्
अभिजित मुहूर्त12:33 PM – 01:22 PM — अभिजित् पर आज दुर्मुहूर्त पड़ रहा है — इसलिए इसे शुभ नहीं गिना गया।
दुर्मुहूर्त10:09 AM – 10:57 AM

दिन चौघड़िया

लाभ06:57 AM – 08:27 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत08:27 AM – 09:57 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल09:57 AM – 11:27 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ11:27 AM – 12:58 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग12:58 PM – 02:28 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग02:28 PM – 03:58 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर03:58 PM – 05:28 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ05:28 PM – 06:59 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम

रात्रि चौघड़िया

उद्वेग06:59 PM – 08:28 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर08:28 PM – 09:58 PMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:58 PM – 11:28 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत11:28 PM – 12:58 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:58 AM – 02:27 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ02:27 AM – 03:57 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:57 AM – 05:27 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग05:27 AM – 06:57 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle