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VedicSpaceपंचांगलंदन › 2026-08-02

लंदन पंचांग — 2 अगस्त 2026

कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र · रविवार · इंग्लैंड (51.5074°, -0.1278°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948कर्क (आषाढ़)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना लंदन (51.5074°, -0.1278°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:25 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष चतुर्थीतक 06:45 PMरिक्ता तिथि — क्षयकारी; कठोर अथवा नित्य कर्मों हेतु।
वाररविवारअधिकार, शासन, औषधि, पिता, पराक्रम, स्वर्ण।
नक्षत्रपूर्वाभाद्रपद · पाद 3तक 05:07 PMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगअतिगण्डतक 05:59 PMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणबवतक 06:45 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:25 AM
सूर्यास्त08:47 PM
चन्द्रोदय10:05 PM
चन्द्रास्त09:40 AM
चन्द्र राशिकुम्भ
सूर्य राशिकर्क
अयन · ऋतुदक्षिणायन · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:35 PM – 01:36 PM
ब्रह्म मुहूर्त03:49 AM – 04:37 AM
अमृत काल08:17 AM – 09:56 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल06:51 PM – 08:47 PM
गुलिक काल04:56 PM – 06:51 PM
यमगण्ड01:06 PM – 03:01 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त06:44 PM – 07:45 PM

दिन चौघड़िया

उद्वेग05:25 AM – 07:20 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर07:20 AM – 09:15 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ09:15 AM – 11:10 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत11:10 AM – 01:06 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल01:06 PM – 03:01 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ03:01 PM – 04:56 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग04:56 PM – 06:51 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग06:51 PM – 08:47 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

शुभ08:47 PM – 09:51 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग09:51 PM – 10:56 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग10:56 PM – 12:01 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर12:01 AM – 01:06 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ01:06 AM – 02:10 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत02:10 AM – 03:15 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल03:15 AM – 04:20 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ04:20 AM – 05:25 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle