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VedicSpaceपंचांगलंदन › 2027-07-20

लंदन पंचांग — 20 जुलाई 2027

कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि, श्रवण नक्षत्र · मङ्गलवार · इंग्लैंड (51.5074°, -0.1278°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949कर्क (आषाढ़)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना लंदन (51.5074°, -0.1278°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:06 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष द्वितीयातक 09:51 PMभद्रा तिथि (पक्ष की 2, 7 और 12) — शुभ एवं सहायक।
वारमङ्गलवारपराक्रम, शल्य-चिकित्सा, भूमि, विवाद — शुभ आरम्भ वर्जित।
नक्षत्रश्रवण · पाद 3तक 01:01 PMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगप्रीतितक 01:02 PMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणतैतिलतक 08:35 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:06 AM
सूर्यास्त09:06 PM
चन्द्रोदय09:58 PM
चन्द्रास्त06:45 AM
चन्द्र राशिमकर
सूर्य राशिकर्क
अयन · ऋतुदक्षिणायन · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त12:34 PM – 01:38 PM
ब्रह्म मुहूर्त03:30 AM – 04:18 AM
अमृत काल

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल05:06 PM – 07:06 PM
गुलिक काल01:06 PM – 03:06 PM
यमगण्ड09:06 AM – 11:06 AM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त11:30 AM – 12:34 PM
दुर्मुहूर्त03:46 PM – 04:50 PM

दिन चौघड़िया

रोग05:06 AM – 07:06 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग07:06 AM – 09:06 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर09:06 AM – 11:06 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ11:06 AM – 01:06 PMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत01:06 PM – 03:06 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल03:06 PM – 05:06 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ05:06 PM – 07:06 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग07:06 PM – 09:06 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

काल09:06 PM – 10:06 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ10:06 PM – 11:06 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग11:06 PM – 12:06 AMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग12:06 AM – 01:06 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर01:06 AM – 02:06 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ02:06 AM – 03:06 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत03:06 AM – 04:06 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल04:06 AM – 05:06 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle