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VedicSpaceपंचांगप्रयागराज › 2027-04-04

प्रयागराज पंचांग — 4 अप्रैल 2027

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि, शतभिषा नक्षत्र · रविवार · उत्तर प्रदेश (25.4358°, 81.8463°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2084 (रौद्री)शक संवत् 1949मीन (फाल्गुन)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना प्रयागराज (25.4358°, 81.8463°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:51 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष त्रयोदशीतक 05:23 AMजया तिथि — शुभ एवं सहायक।
वाररविवारअधिकार, शासन, औषधि, पिता, पराक्रम, स्वर्ण।
नक्षत्रशतभिषा · पाद 3तक 04:33 PMचर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म।
योगशुभतक 10:14 AMशुभ नित्य-योग — दिन के कार्यों का पोषक।
करणगरतक 05:00 PMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:51 AM
सूर्यास्त06:20 PM
चन्द्रोदय04:08 AM
चन्द्रास्त03:58 PM
चन्द्र राशिकुम्भ
सूर्य राशिमीन
अयन · ऋतुउत्तरायण · शिशिर

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:40 AM – 12:30 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:15 AM – 05:03 AM
अमृत काल08:42 AM – 10:24 AM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल04:46 PM – 06:20 PM
गुलिक काल03:12 PM – 04:46 PM
यमगण्ड12:05 PM – 01:39 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त04:40 PM – 05:30 PM

दिन चौघड़िया

उद्वेग05:51 AM – 07:24 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर07:24 AM – 08:58 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:58 AM – 10:31 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:31 AM – 12:05 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:05 PM – 01:39 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ01:39 PM – 03:12 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:12 PM – 04:46 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग04:46 PM – 06:20 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

शुभ06:20 PM – 07:46 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग07:46 PM – 09:12 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग09:12 PM – 10:39 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर10:39 PM – 12:05 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ12:05 AM – 01:31 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत01:31 AM – 02:58 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल02:58 AM – 04:24 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ04:24 AM – 05:51 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle