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VedicSpaceपंचांगविशाखापत्तनम › 2026-08-02

विशाखापत्तनम पंचांग — 2 अगस्त 2026

कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र · रविवार · आंध्र प्रदेश (17.6868°, 83.2185°)

दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948कर्क (आषाढ़)

पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना विशाखापत्तनम (17.6868°, 83.2185°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 05:36 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।

फल
तिथिकृष्ण पक्ष चतुर्थीतक 11:15 PMरिक्ता तिथि — क्षयकारी; कठोर अथवा नित्य कर्मों हेतु।
वाररविवारअधिकार, शासन, औषधि, पिता, पराक्रम, स्वर्ण।
नक्षत्रपूर्वाभाद्रपद · पाद 2तक 09:37 PMउग्र नक्षत्र — विध्वंस, शस्त्र, कठोर कर्म — शुभ कर्म वर्जित।
योगअतिगण्डतक 10:29 PMअशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित।
करणबवतक 11:15 AMचर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त।
इस पृष्ठ के गुण-शब्द

सूर्य–चन्द्र

सूर्योदय05:36 AM
सूर्यास्त06:31 PM
चन्द्रोदय09:01 PM
चन्द्रास्त08:30 AM
चन्द्र राशिकुम्भ
सूर्य राशिकर्क
अयन · ऋतुदक्षिणायन · ग्रीष्म

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त11:37 AM – 12:29 PM
ब्रह्म मुहूर्त04:00 AM – 04:48 AM
अमृत काल12:57 PM – 02:36 PM

अशुभ काल — वर्जित

राहु काल04:54 PM – 06:31 PM
गुलिक काल03:17 PM – 04:54 PM
यमगण्ड12:03 PM – 01:40 PM
वर्ज्यम्
दुर्मुहूर्त04:47 PM – 05:39 PM

दिन चौघड़िया

उद्वेग05:36 AM – 07:12 AMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर07:12 AM – 08:49 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ08:49 AM – 10:26 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत10:26 AM – 12:03 PMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल12:03 PM – 01:40 PMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ01:40 PM – 03:17 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग03:17 PM – 04:54 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग04:54 PM – 06:31 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित

रात्रि चौघड़िया

शुभ06:31 PM – 07:54 PMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा
रोग07:54 PM – 09:17 PMरोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित
उद्वेग09:17 PM – 10:40 PMउद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित
चर10:40 PM – 12:03 AMचर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य
लाभ12:03 AM – 01:26 AMलाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम
अमृत01:26 AM – 02:49 AMअमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम
काल02:49 AM – 04:12 AMकाल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित
शुभ04:12 AM – 05:36 AMशुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा

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अन्य तिथियाँ

अन्य नगरों का पञ्चाङ्ग

स्रोत एवं प्रमाण

P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
T3 Durmuhurta — muhurta slots by weekday (standard panchang convention; no verse for it in our library, so it is not cited to one)
T3 Muhurta Chintamani — Choghadiya/Kalahora prakarana; weekday-rotated 7-cycle