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कोलकाता पंचांग — 14 दिसम्बर 2026
शुक्ल पक्ष पञ्चमी तिथि, श्रवण नक्षत्र · सोमवार ·
पश्चिम बंगाल (22.5726°, 88.3639°)
दिन शुद्धि: शुद्धविक्रम संवत् 2083 (सिद्धार्थी)शक संवत् 1948मार्गशीर्ष (अमान्त मास)सौर मास वृश्चिक (कार्तिक)
पंचांग का अर्थ है दिन के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। ये पाँचों सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से निकलते हैं और दिन भर बदलते रहते हैं, इसलिए इनकी गणना कोलकाता (22.5726°, 88.3639°) के अपने सूर्योदय — आज यहाँ 06:08 AM से की जाती है, किसी देश-भर के औसत से नहीं। नीचे इन्हीं पाँचों के आज के मान हैं, उनके समाप्ति-काल के साथ, और उसके बाद दिन के शुभ और अशुभ समय।
| | | फल |
|---|
| तिथि | शुक्ल पक्ष पञ्चमी | तक 07:16 PM | पूर्णा तिथि — शुभ एवं सहायक। |
| वार | सोमवार | — | यात्रा, जल-द्रव्य, लोक-व्यवहार, शान्ति, माता, कोमल कर्म। |
| नक्षत्र | श्रवण · पाद 4 | तक 09:12 AM | चर नक्षत्र — यात्रा, वाहन, उद्यान, चंचल एवं गतिशील कर्म। |
| योग | व्याघात | तक 01:04 PM | अशुभ नित्य-योग — शुभ कर्म वर्जित। |
| करण | बालव | तक 07:16 PM | चर करण — प्रायः सभी कार्यों हेतु उपयुक्त। |
इस पृष्ठ के गुण-शब्द
- शुभ — शास्त्र इस अंग को अनुकूल कहता है
- मध्यम — न विशेष अनुकूल, न वर्जित
- अशुभ — शुभ कार्यों के लिए वर्जित
सूर्य–चन्द्र
| सूर्योदय | 06:08 AM |
| सूर्यास्त | 04:54 PM |
| चन्द्रोदय | 09:58 AM |
| चन्द्रास्त | 09:20 PM |
| चन्द्र राशि | मकर |
| सूर्य राशि | वृश्चिक |
| अयन · ऋतु | दक्षिणायन · शरद् |
शुभ मुहूर्त
| अभिजित मुहूर्त | 11:09 AM – 11:52 AM |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:22 AM – 05:15 AM |
| अमृत काल | 12:19 AM, 15 दिसम्बर – 02:06 AM, 15 दिसम्बर |
अशुभ काल — वर्जित
| राहु काल | 07:28 AM – 08:49 AM |
| गुलिक काल | 12:51 PM – 02:12 PM |
| यमगण्ड | 10:10 AM – 11:31 AM |
| वर्ज्यम् | 01:39 PM – 03:25 PM |
| दुर्मुहूर्त | 11:53 AM – 12:36 PM |
| दुर्मुहूर्त | 02:02 PM – 02:45 PM |
दिन चौघड़िया
| | |
|---|
| अमृत | 06:08 AM – 07:28 AM | अमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम |
| काल | 07:28 AM – 08:49 AM | काल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित |
| शुभ | 08:49 AM – 10:10 AM | शुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा |
| रोग | 10:10 AM – 11:31 AM | रोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित |
| उद्वेग | 11:31 AM – 12:51 PM | उद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित |
| चर | 12:51 PM – 02:12 PM | चर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य |
| लाभ | 02:12 PM – 03:33 PM | लाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम |
| अमृत | 03:33 PM – 04:54 PM | अमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम |
रात्रि चौघड़िया
| चर | 04:54 PM – 06:33 PM | चर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य |
| रोग | 06:33 PM – 08:12 PM | रोग — संघर्ष, ऋण-वसूली; शुभ आरम्भ वर्जित |
| काल | 08:12 PM – 09:51 PM | काल — धन-संचय, वाद-विवाद; शुभ आरम्भ वर्जित |
| लाभ | 09:51 PM – 11:31 PM | लाभ — व्यापार, वाणिज्य, नवीन उपक्रम |
| उद्वेग | 11:31 PM – 01:10 AM | उद्वेग — केवल राजकीय / उत्तेजक कार्य; शुभ आरम्भ वर्जित |
| शुभ | 01:10 AM – 02:49 AM | शुभ — विवाह, संस्कार, शिक्षा |
| अमृत | 02:49 AM – 04:28 AM | अमृत — समस्त शुभ कर्मों हेतु सर्वोत्तम |
| चर | 04:28 AM – 06:08 AM | चर — यात्रा, वाहन, चंचल कार्य |
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स्रोत एवं प्रमाण
❖ P Sun/Moon sidereal longitudes via Swiss Ephemeris (pyswisseph), Lahiri/Chitrapaksha ayanamsa
❖ T1 Surya Siddhanta — tithi=Moon−Sun/12°, nakshatra=Moon/13°20′, yoga=(Sun+Moon)/13°20′, karana=half-tithi
❖ T3 Rahu/Yamaganda/Gulika kalam — 8 equal day-octants by weekday (standard panchang convention)
❖ T2 Prasna Marga — Visha (Varjyam) & Amrita ghati table per nakshatra
❖ T2 Muhurta Chintamani — auspicious/inauspicious yogas, masa/ritu/ayana
❖ T2 Abhijit = the midday muhurta — Jaimini Sutras, B. S. Rao 1955, commentator's note to Su.27: “The mid-day goes under the name of Abhijit and is considered as very auspicious for all work. It cuts away all evils. Abhijit sarva doshaghnam.” Day divided into 15 muhurtas of 2 ghati each, varying with daylength — Brihat Parasara Hora Sastra (Tara Chandra Shastri / Khemaraja edition)
❖ T2 Durmuhurta — Muhurta Chintamani, Vivaha-prakarana v.52 (ravav aryama brahmarakshash ca some kuje vahnipitrye budhe cabhijit syat; gurau toyarakshau bhrigau brahmapitrye shanav ishasarpau muhurta nishiddhah), the slots numbered from the day-muhurta list v.50 and the night list v.51; Tuesday's Vahni is the night muhurta (the day list holds only the joint Indragni)
❖ T2 Visha (Varjyam) ghatis per nakshatra — Muhurta Chintamani, Vivaha-prakarana vv.47–49, scaled to the nakshatra's true span (nakshatrabhogena nighnah shashtya bhajitah sphutah, v.49); Prasna Marga's table differs in Ardra, Hasta and Mula
❖ T2 Ravi yoga — Muhurta Chintamani, Shubhashubha-prakarana v.27: the Moon's nakshatra 4th, 6th, 9th, 10th, 13th or 20th from the Sun's (doshasanghavinashakah); windowed at the nakshatra boundaries of either body
❖ T2 Bhadra (Vishti karana) and her abode — Muhurta Chintamani, Shubhashubha-prakarana vv.43–45: which tithi-halves are Vishti; Moon in Kumbha/Mina/Karka/Simha = the mortal world (harmful), Mesha/Vrisha/Mithuna/Vrishchika = Svarga, Kanya/Tula/Dhanu/Makara = Patala (yatra bhadra tatraiva tatphalam)
❖ T2 Pancha-bana — Muhurta Chintamani, Vivaha-prakarana v.71 (the Prachya rule, Kashyapa quoted): the Sun's whole degrees in its sign + 6, 3, 1, 8, 4, each divided by 9, a remainder of 5 marks Roga, Agni, Raja, Chora, Mrityu; parihara v.72
❖ T2 Agni-vasa — Muhurta Chintamani, Nakshatra-prakarana v.36: tithi + vara + 1 divided by four; remainder 0 or 3 Prithvi, 1 Akasha, 2 Patala
❖ T2 Sandhya = three nadi reckoned from the Sun's half-disc, before rising and after setting — Muhurta Chintamani, Sankranti-prakarana v.7; taken as three proportional night-ghatis (night/30 each) following DrikPanchang's convention. Godhuli width (one night-ghati after sunset), Vijaya (the 11th day-muhurta) and Nishita (the middle night-muhurta; nishitha = ardharatra) are stated conventions, not verses
❖ T3 Chandra-vasa (by the Moon's rashi), Rahu-vasa (by weekday) and Shiva-vasa ((2×tithi + 5) mod 7) — pancanga conventions verified against 30 published tithi-days; no verse for them in our library, so they are not cited to one